Thursday, March 8, 2012

पतझड़........

उजड़ा उजड़ा सा है समां अब,
पतझड़ सा है हर मौसम अब,
जाने कहाँ ख़ुशी खो गयी,
जाने कहाँ होटों की हंसी रह गयी,
आँखों में नमी कब से बरक़रार है,
हर सांस में दर्द शिद्दत से विराजमान है,
सब कुछ धुंधला सा लगता है,
तपती रेत में पानी की खोज सा लगता है,
जाने कब से इन आँखों में नींद नहीं,
जाने कब से इस आत्मा को चैन नहीं,
उजड़ी हुई सी दुनिया लगती है,
हर दिशा से ख़ामोशी सुनाई देती है,
कल तक जहाँ हंसी का सावन था,
आज वहीँ आंसुओं का डेरा है,
दुनिया से रिश्ता टूटा सा लगता है,
हर दिल एक अलग ही गम से भरा लगता है,
फिर क्यूँ यह दर्द अपनी हद से बाहर है,
फिर क्यूँ हर सांस एक कर्ज सी है,
हर आहट में तेरा एहसास है,
हर चेहरे में तेरा अक्स है,
आस अभी भी है बहार की,
इस तपती रेत में छाँव की,
इंतज़ार ही है करना अब,
पतझड़ सा है हर मौसम अब||

Saturday, April 17, 2010

वजूद की तलाश ..........


मैं कौन हूँ आखिर
इस वह्शी दुनिया में क्या कोई अस्तित्व है मेरा
अस्तित्व तो जरुर है
लेकिन क्या कोई वजूद है मेरा
नहीं, और कभी यह मतलब परस्त दुनिया होने भी नहीं देगी
तो फिर बिना वजूद के इस अस्तित्व का क्या कोई आशय है
मेरे लिए नहीं लेकिन संसार के लिए है 
जब चाहे मुझे रोंद कर आगे बढ़ सकता है
जब चाहे मुझे सिड़ी समझ सकता है 
लेकिन मैं कभी उसे दोषी नहीं समझती 
आखिर मैं उसकी जननी हूँ
उसकी अर्धांगिनी हूँ 
लेकिन क्या वो यह समझता है 
क्या वो मुझे मेरा वजूद दे सकता है
कभी नही तो फिर मैं इतनी उदार कैसे हूँ
क्यूंकि मैं एक नारी हूँ,
जिसका सदाचार, सहनशील ही परम गुण है
लेकिन नारी को इस तरह कुचलना क्या यथार्थ है
यह प्राणी भूल गये हैं
 नारी भी कभी दुर्गा का रूप धर सकती है
 मैं अगर शांति का प्रतीक हूँ , 
मैं विनाश का चिन्ह भी हो सकती हूँ 
मैं अपने वजूद की तलाश में हूँ 
यह तलाश कितनी लम्बी है कोई नहीं जानता
क्यूंकि कोई इसकी जरुरत को समझना नहीं चाहता 
मैं हर जगह से लहूलुहान हूँ 
इस तपती रेगिस्तान में तड़पती हूँ
बस एक आशा की किरण है 
कभी तो मैं अपना वजूद हांसिल कर पाऊँगी
कभी मैं भी अपना आप साबित कर सकुंगी 
लेकिन उसके पहले है 
एक लम्बा इंतज़ार बस इंतज़ार

Thursday, April 15, 2010

जिंदगी .... एक यात्रा या.....??

जिन्दगी क्या है
शायद एक लम्बी यात्रा 
दुसरे पल लगा नहीं एक पहेली है
फिर लगा नहीं दूसरों के हाथ की कठपुतली है
हाँ शायद यही है जिंदगी
जहाँ अपना कोई अस्तित्व नही है 

जहाँ हर ख़ुशी दूसरों की मोहताज़ है 
आखिर यह दुसरे हैं कौन
हमें अपनी उँगलियों पर नाचने वाले यह होते कौन हैं

क्या वो जिन्हें हम खुद इतना हक देते हैं 
या वो जो खुद सिरमोर बन जाते हैं
इसमें दोष किसका है हमारा या उनका
जिंदगी के इस सूनेपन का कसूर किसका है 
हमारा है और यही गूढ़ रहस्य है 
आखिर हम इतने सदाशय क्यूँ हैं
अपनी छोटी छोटी खुशियों की बागडोर क्यूँ किसी को देते हैं
शायद यह बात लोग समझना नही चाहते हैं
या फिर स्वीकार करने से कतराते हैं ..
.
यह जिंदगी तुम्हारी है ...
हर ख़ुशी का अधिकार तुम्हारा है
जिंदगी को क्या बनाना है
इसका निश्चय तुम करोगे कोई और नहीं
यह जिंदगी बहुत ही खुबसूरत बहुत ही प्यारी है
इसे एक यादगार यात्रा बनाओ
न की दूसरों के हाथ की कठपुतली ....
.

Monday, February 1, 2010

एक अनसुलझी पहेली


एक अनसुलझी  पहेली हूँ मैं
हर रात की सहेली हूँ मैं
मैं नहीं जानती मैं कौन हूँ
बस एक अनकही कहानी हूँ मैं
जिंदगी के हर मोड़ पर अकेले है चलना
दुनिया के सारे  दस्तूरों को है निभाना
सब जानते हुए भी नहीं पता क्या ऐसा है
हर जगह खुद को तलाशता नजरिया है
गिला नहीं है किसी बात का मुझे
मिला सब कुछ है मेरे खुदा से मुझे
तब क्यूँ एक कमी सी लगती है यहाँ
भीड़ में भी तन्हाई सी महसूस होती है यहाँ
अपने आप को धुन्ध्ते हुए कहीं खो जाती हूँ मैं
साहिल में डोलती हुई कश्ती लगती हूँ मैं
ऐसा लगता है कोई मुझे समझना नही चाहता है
फिर दुसरे पल लगता है मुझे किसको समझाना है
एक बंद किताब की तरह हूँ मैं
या शायद एक अनसुलझी पहेली हूँ मैं 

dedicated to you banasthalites!!!


"bas ek bar wapas lautne ka man karta hai

Aaj har wo din jeene ko man karta hai.
kuch buri batein jo ab acchi lagti hain

kuch batein jo kal ki hi batein lagti hain.

abki baar class attend karne ka man karta hai

Dopahar ki class mein aakhein band karne ko man karta hai.

Doston ke room ki wo baatein yaad aati hai

exam ke time pe wo hasi mazak yaad aati hai,
college ke paas NESCI ki yaad aati hai

tab ki bekar lagne wali photos chehre pe hasi laati hai.

Apni galtiyon pe tumse daat khana yaad aata hai.

Par tumhari galti dekhne ka ab bhi mann karta hai.
Ek aisi subah uthne ka mann karta hai

bas ek bar wapas lautne ka man karta hai.

bas ek bar aur

wapas lautne ka man karta hai."*